ब्रजस्थ मैथिल ब्राह्मण सभा मथुरा Brajastha Maithil Brahman Sabha

हमारा परिचय

Shri Brajasth Maithil Brahman mahasammelan Agra, Shakha Mathura 2024
Shri Brajasth Maithil Brahman mahasammelan Agra, Shakha Mathura 2024
Shri Brajasth Maithil Brahman mahasammelan Agra, Shakha Mathura 2024

हमारा संगठन एक समर्पित और प्रेरित टीम द्वारा संचालित है, जो ब्राह्मण समाज की सांस्कृतिक और सामाजिक उन्नति के प्रति प्रतिबद्ध है। हम अपने समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को संजोते हुए, समाज के हर वर्ग के विकास और सशक्तिकरण के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। हमारे कार्यक्रम और गतिविधियाँ समाज की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन की जाती हैं, ताकि हम शिक्षा, स्वास्थ्य, और सामाजिक सहयोग के माध्यम से सकारात्मक बदलाव ला सकें। हमारी दृष्टि है कि हर सदस्य को एक समान अवसर मिले और समाज में समृद्धि और शांति का माहौल बने। हम एकजुटता और सहयोग की भावना को बढ़ावा देते हुए, ब्राह्मण समाज की उन्नति के लिए निरंतर काम करते हैं।

ब्रजस्थ मैथिल ब्राह्मण सभा मथुरा Brajastha Maithil Brahman Sabha

समाज को समर्पित हमारा उद्देश्य

ब्रजस्थ मैथिल ब्राह्मण सभा मथुरा Brajastha Maithil Brahman Sabha

हमारा संगठन समाज के सांस्कृतिक, शैक्षिक, और आर्थिक विकास के लिए समर्पित है। ब्राह्मण समाज की परंपराओं और मूल्यों को संजोते हुए, हम भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हैं। शिक्षा, समानता, और सेवा हमारे प्रमुख लक्ष्य हैं, जिनके माध्यम से हम समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने का प्रयास कर रहे हैं। हम सभी के लिए एक बेहतर और समृद्ध भविष्य की दिशा में संगठित प्रयास कर रहे हैं, जिससे न केवल ब्राह्मण समाज, बल्कि सम्पूर्ण देश उन्नति की ओर अग्रसर हो।

गौरव से परिपूर्ण हमारा इतिहास

भूमिका

भारत की प्राचीन सभ्यता में मिथिला और मैथिल ब्राह्मणों का स्थान अत्यंत गौरवपूर्ण रहा है। वेद, उपनिषद, स्मृति, पुराण, न्याय, दर्शन और व्याकरण जैसे शास्त्रों के विकास में मिथिला के विद्वानों का योगदान अद्वितीय है। आज जब “Maithil Brahman” और “Maithil” जैसे शब्द इंटरनेट और सामाजिक विमर्श में खोजे जाते हैं, तब यह आवश्यक हो जाता है कि इस समुदाय का इतिहास, पहचान और सामाजिक भूमिका को विद्वतापूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया जाए। यह लेख बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के एक शोधार्थी की दृष्टि से मैथिल ब्राह्मणों के इतिहास, विशेषतः उत्तर प्रदेश में बसे व्रजस्थ मैथिल ब्राह्मणों की परंपरा, संघर्ष और सांस्कृतिक धरोहर को प्रस्तुत करता है।

मिथिला और मैथिल परंपरा

मिथिला का उल्लेख वैदिक काल से मिलता है। यह वही भूमि है जहाँ राजा जनक, महर्षि याज्ञवल्क्य, गार्गी, मैत्रेयी जैसे महान विद्वान उत्पन्न हुए। मिथिला को विदेह देश भी कहा गया, जिसकी स्थापना राजा मिथि ने की थी। मिथिला केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं था, बल्कि यह भारतीय ज्ञान-परंपरा का एक प्रमुख केंद्र था। यहाँ न्याय, मीमांसा, वेदांत, व्याकरण और ज्योतिष जैसे विषयों में उच्च स्तर का अध्ययन होता था। इसी कारण यहाँ के ब्राह्मण “मैथिल ब्राह्मण” कहलाए। “Maithil” शब्द केवल भाषा या क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सांस्कृतिक और बौद्धिक पहचान का प्रतीक है।

सक्षम और दक्ष हमारा संगठन

हम समाज के हर क्षेत्र में उत्कृष्टता की ओर अग्रसर होने का प्रयास करते हैं, ताकि हर सदस्य को बेहतर जीवन की दिशा में योगदान मिल सके। हमारी प्रतिबद्धता है कि हम हर कार्य को पूर्ण क्षमता और दक्षता के साथ निभाएं, जिससे समाज का हर पहलू समृद्ध और सशक्त हो।"

ब्रजस्थ मैथिल ब्राह्मण सभा मथुरा Brajastha Maithil Brahman Sabha

महासचिव

श्री के एस शर्मा

ब्रजस्थ मैथिल ब्राह्मण सभा मथुरा Brajastha Maithil Brahman Sabha

अध्यक्ष, शाखा सभा

श्रीमती सुशीला पाठक

ब्रजस्थ मैथिल ब्राह्मण सभा मथुरा Brajastha Maithil Brahman Sabha

अध्यक्ष

श्री हीरालाल शर्मा

सामाजिक कार्यक्रमों की हमारी झलकियां

Thumbnail 0
Thumbnail 1
Thumbnail 2
Thumbnail 3
Thumbnail 4
Thumbnail 5
Thumbnail 6
Thumbnail 7

संपर्क हमारा स्थान

पता

श्री ब्रजस्थ मैथिल ब्राह्मण हनुमान मन्दिर धर्मशाला, धौलीप्याऊ मथुरा उत्तर प्रदेश

दूरभाष
कॉल करने के लिए नंबर टच करें

+91-8630285841

+91-9411086083


+91-9582818240


Powered by